history of computer

History of computer in hindi: नमस्कार दोस्तों इस पोस्ट में हम कंप्यूटर के इतिहास के बारे में जानेंगे। कंप्यूटर एक मशीन है जिसे अंकगणित या तार्किक संचालन के अनुक्रमों को स्वचालित रूप से करने के लिए प्रोग्राम किया जा सकता है। प्रोग्रामिंग के बारे में पढ़ें – Python Programming कैसे सीखे?

What is Computer? – History of Computer in Hindi

कंप्यूटर एक electronic उपकरण है जिसे सूचना के साथ काम करने के लिए design किया गया है। यह Program के बिना कुछ नहीं कर सकता। यह केवल 2 अंक समझता है जिसे binary digit कहते हैं। आइए एक नजर डालते हैं कंप्यूटर के इतिहास पर।

History of Computer in Hindi

कंप्यूटर का इतिहास काफी पुराना है और सबसे पहले ज्ञात गणना उपकरण शायद अबेकस है। यह कम से कम 1100 ईसा पूर्व का है और आज भी विशेष रूप से एशिया में उपयोग में है।

Computer शब्द का निर्माण compute से हुआ है जिसका अर्थ है “गणना करना”। इसलिए जब पहली बार ऐसी मशीन का आविष्कार हुआ जो गणना कर सकती थी तो उसी मशीन के निर्माण से ही कम्प्यूटर के इतिहास की शुरूआत होती है।

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कंप्यूटर का आविष्कार किसने किया?

चार्ल्स बैबेज को “कंप्यूटर का जनक” माना जाता है। बैबेज को पहले Mechanical computer , Difference engine का आविष्कार करने का श्रेय दिया जाता है, जिसने अंततः अधिक जटिल इलेक्ट्रॉनिक डिजाइनों को जन्म दिया।

हम बात कर रहे हैं Abacus नाम के उस calculation मशीन की, जिसका निर्माण 2nd शदाब्दी BC (2700–2300 BC) में चीन में हुआ था।

Different Types of Computer – History of Computer in Hindi

अबाकस (Abacus)

Abacus तारों का एक ऐसा फ्रेम था जिसमें मिट्टी के पके हुए गोले (बीड) पिरोए हुए थे। ये बीड ऊपर और नीचे की तरफ खिसकते थे।

अबाकस से केवल जोड़ने और घटाने का ही काम किया जा सकता था। इस मशीन के जरिए गुणा और भाग नहीं किया जा सकता था।

यह एक mechanical calculator है। आज भी चीन और जापान जैसे कई देशों में लोग abacus का इस्तेमाल करते हैं।

नैपियर बोन्स (Napier’s bones)

अबाकस के निर्माण के कई शताब्दियों बाद सन् 1617 में जॉन नैपियर ने गणना करने के लिए एक यंत्र बनाया।

यह मशीन आयताकार थी और इसमें छड़ें लगी हुई थीं जिस पर multiplication tables खुदी हुई थी, जिसकी मदद से गुणा और भाग किया जा सकता था।

यह मशीन गुणा और भाग करने के साथ ही square root निकालने का भी काम करती थी।

इस मशीन से calculation करने के लिए व्यक्ति को manually operate करना पड़ता था।

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पास्कलाइन (Pascaline or Pascal’s calculator or arithmetic machine)

अबाकस और नैपियर बोन्स के निर्माण के बाद सतरहवीं शताब्दी के मध्य में ही ब्लेज़ पास्कल ने गणना यंत्र Pascaline का आविष्कार किया।

Pascaline आकार में इतनी छोटी थी कि इसे हाथ में लेके कहीं भी जा सकते थे। यह एक आयताकार बक्से की तरह थी जिसमें चकरी लगी हुई थी।

पास्कलाइन ने अपने इस गणना यंत्र का निर्माण सन 1642 में ही कर लिया था लेकिन   50 prototypes (sample for testing) करने के बाद ही सन 1645 में Pascaline को जनता के सामने प्रस्तुत किया।

इस मशीन के जरिए सीधे दो अंको को जोड़ा या घटाया जा सकता था और repeated जोड़ या घटाव की मदद से गुणा और भाग भी किया जा सकता था।

Pascal’s calculator अबाकस की तुलना में ज्यादा तेज और अच्छी थी।

जेकार्ड लूम (Jacquard loom)

यह कोई गणना यंत्र नहीं था। लेकिन इस यंत्र में इस्तेमाल की गई तकनीक से आगे चलकर एनालिटिकल कम्प्यूटर के निर्माण में सहायता मिली।

फ्रांसीसी वैज्ञानिक जोसेफ जैकार्ड ने एक ऐसे लूम का निर्माण किया जिसकी मदद से कपड़े बुनने की मशीन को प्रोग्राम किया जा सके।

इसके लिए जैकार्ड ने पंचकार्ड का इस्तेमाल किया। इन पंचकार्डों पर डिजाइनयुक्त छिद्र बने होते थे।

कपड़े बुनने वाली मशीन इन पंचकार्ड पर बने डिजाइन को फॉलो करती थी। और उसी डिजाइन में कपड़े बुनती थी।

आसान शब्दों में कहें तो वैज्ञानिक जोसेफ जैकार्ड ने पहली बार प्रग्रामिंग पद्धति से चलने वाले मशीन का निर्माण किया था जो उस वक्त के लिए बिल्कुल नई तकनीक थी।

डिफरेंस इंजन और एनालिटिकल इंजन

Charles Babbage ने 1820s में ऑटोमैटिक मेकेनिकल कंप्यूटर का आविष्कार किया जिसका नाम उन्होंने डिफरेंस इंजन(difference engine) रखा।

यह मशीन logarithmic और trigonometric functions कर सकती थी।

पंच कार्ड तकनीक का इस्तेमाल करते हुए Sir Charles Babbage ने सन् 1837 में difference engine के विकसित रूप Analytical Engine को प्रस्तुत किया।

Analytical Engine ही वर्तमान इलेक्ट्रौनिक कंप्यूटर के निर्माण की नींव है। इसलिए आज के समय में Charles Babbage को कंप्यूटर का जनक या पिता कहा जाता है।

Analytical Engine चार्ल्स बैबेज के जीवन का सबसे सफल आविष्कार था जिसने कंप्यूटर जगत में क्रांति ला दी।

इसके बाद चार्ल्स बैबेज पैसे की कमी और अपने सीनियर इंजिनियर से झगड़े के कारण कम्प्यूटर के क्षेत्र में और अधिक काम नहीं कर पाए।

Z3 (computer)

सन 1941 में Konrad Zuse ने पहला general-purpose computer, “Z3” प्रस्तुत किया।

यह दुनिया का सबसे पहला प्रोग्राम किया जा सकने वाला, पूरी तरह से ऑटोमैटिक  डिजिटल कंप्यूटर था।

Z3 एक विद्युत से चलने वाला कंप्यूटर नहीं था। इसमें 2600 विद्युत स्विच लगे हुए थे जिसे रिले कहा जाता था।

Colossus computer

बहुत से लोगों का कहना है कि Colossus सबसे पहला इलेक्ट्रोनिक कंप्यूटर है जबकि यह सत्य नहीं है।

Colossus एक नहीं बल्कि एक साथ कई कंप्यूटरों का एक सेट था जिसका निर्माण  British codebreakers ने 1943–1945 के बीच किया।

यह कंप्यूटर भी programmable, electronic, digital था। लेकिन इसमें प्रोग्रामिंग switches और plugs की सहायता से की जाती थी।

ENIAC (computer)

ENIAC का निर्माण 1945 में  united states में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हुआ था।

यह दुनिया का सबसे पहला प्रोग्राम किया जा सकने वाला, पूरी तरह से ऑटोमैटिक electronic general-purpose digital computer था।

इसका निर्माण united states की आर्मी के लिए किया गया था। यह कंप्यूटर अन्य कंप्यूटरों की तुलना में बहुत तेज था।

यह कंप्यूटर लगभग एक कमरे के बराबर आकार का था और इसका वजन लगभग 30 टन था।

ENIAC को 1946 में press के जरिए “Giant Brain”  का नाम भी दिया गया।

आधुनिक कंप्यूटर

आधुनिक कंप्यूटर (Modern Computer) के सिद्धांत का प्रस्ताव एलन ट्यूरिंग(Alan Turing) ने अपने मूल 1936 के पेपर में किया था। Turing के डिजाइन की मौलिक अवधारणा एक प्रोग्राम स्टोर करना है, जहां कंप्यूटिंग के सभी निर्देश memory में संग्रहीत होते हैं।

आज का कंप्यूटर हमें प्रोग्रामिंग भाषाओं जैसे पायथन, C++, JavaScript आदि के साथ आसानी से Program लिखने की क्षमता देता है। इसके साथ, यह कठिन कार्य, Multitasking, virtual reality, Research और शिक्षा उपयोगी है।

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